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उत्तरप्रदेश : कानपुर के बाजारों में जहां पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल भुगतान ने लेन-देन का तरीका पूरी तरह बदल दिया है, वहीं अब यूपीआई भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) शुल्क लगाए जाने की चर्चा से कारोबारियों में चिंता बढ़ने लगी है। ‘क्यूआर कोड दिखाइए और भुगतान पाइए’ की आदत बना चुके दुकानदार और ग्राहक अब एक बार फिर नकद भुगतान की ओर लौटने की बात करने लगे हैं।
कारोबारियों का कहना है कि यदि यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लागू किया जाता है तो इसका सीधा असर छोटे व्यापारियों पर पड़ सकता है। उनका तर्क है कि रोजाना होने वाले छोटे-छोटे डिजिटल भुगतान पर भी अतिरिक्त लागत बढ़ेगी, जिससे व्यापार का खर्च प्रभावित हो सकता है।
डिजिटल भुगतान से मिली थी बड़ी राहत
कानपुर के व्यापारियों के मुताबिक, यूपीआई आने के बाद बाजार में लेन-देन काफी आसान हो गया है। पहले दुकानदारों को खुले पैसे रखने और छुट्टे की समस्या से जूझना पड़ता था। कई बार छोटे भुगतान के लिए ग्राहक और दुकानदार दोनों को परेशानी होती थी।
डिजिटल भुगतान व्यवस्था शुरू होने के बाद ग्राहक मोबाइल के जरिए आसानी से भुगतान करने लगे। चाहे 20-50 रुपये की खरीदारी हो या हजारों रुपये का भुगतान, कुछ सेकंड में लेनदेन पूरा हो जाता है।
दुकानदारों का कहना है कि इससे कारोबार में तेजी आई और नकदी संभालने की परेशानी भी कम हुई।
MDR शुल्क को लेकर बढ़ी चिंता
यूपीआई मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR शुल्क की चर्चा के बाद व्यापारियों के बीच चिंता बढ़ गई है। कारोबारियों का कहना है कि यदि डिजिटल भुगतान पर शुल्क देना पड़ा तो इसका असर छोटे दुकानदारों पर ज्यादा पड़ेगा।
विशेषकर ऐसे व्यापारी जिनका रोजाना का कारोबार छोटे मूल्य के लेनदेन पर निर्भर करता है, उन्हें अतिरिक्त खर्च का सामना करना पड़ सकता है।
कुछ व्यापारियों का कहना है कि अगर शुल्क लागू हुआ तो वे ग्राहकों को नकद भुगतान के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं, ताकि अतिरिक्त लागत से बचा जा सके।
छोटे व्यापारियों पर पड़ सकता है असर
कानपुर के बाजारों में बड़ी संख्या में छोटे दुकानदार, ठेले वाले, किराना व्यापारी और छोटे कारोबारी डिजिटल भुगतान का इस्तेमाल करते हैं।
इन व्यापारियों के लिए हर दिन बड़ी संख्या में छोटे-छोटे भुगतान होते हैं। ऐसे में उनका कहना है कि छोटी रकम के लेनदेन पर भी शुल्क लगने से कुल खर्च बढ़ सकता है।
व्यापारियों का कहना है कि डिजिटल भुगतान ने ग्राहकों के लिए सुविधा बढ़ाई है, इसलिए ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जिससे कारोबारियों और ग्राहकों दोनों पर अतिरिक्त दबाव न पड़े।
ग्राहकों की सुविधा से जुड़ा मुद्दा
ग्राहकों के लिए भी यूपीआई भुगतान एक आसान विकल्प बन चुका है। कई लोग अब जेब में नकदी रखने की बजाय मोबाइल से भुगतान करना पसंद करते हैं।
खासकर युवा वर्ग और नौकरीपेशा लोग छोटी खरीदारी से लेकर बड़े भुगतान तक डिजिटल माध्यम का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में शुल्क व्यवस्था को लेकर ग्राहकों में भी चर्चा शुरू हो गई है।
बाजार में फिर बढ़ सकती है नकदी की भूमिका
कारोबारियों का कहना है कि शुल्क लागू होने की स्थिति में कुछ लोग दोबारा नकद भुगतान को प्राथमिकता दे सकते हैं। इससे बाजार में नकदी की मांग बढ़ सकती है।
हालांकि, कई व्यापारी यह भी मानते हैं कि डिजिटल भुगतान की सुविधा इतनी मजबूत हो चुकी है कि इसे पूरी तरह छोड़ना आसान नहीं होगा। ग्राहक और दुकानदार दोनों इसकी सुविधा के आदी हो चुके हैं।
व्यापारियों की मांग- व्यवस्था पर हो पुनर्विचार
कानपुर के कई व्यापारियों का कहना है कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए ऐसी व्यवस्था जरूरी है, जिसमें छोटे कारोबारियों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।
उनका कहना है कि यूपीआई ने देश में भुगतान व्यवस्था को सरल बनाया है और छोटे व्यापारियों को भी इससे फायदा मिला है। इसलिए शुल्क से पहले इसके संभावित प्रभावों पर व्यापक विचार किया जाना चाहिए।
डिजिटल और नकदी दोनों के बीच संतुलन
यूपीआई के बढ़ते इस्तेमाल के बीच MDR शुल्क को लेकर उठी चर्चा ने व्यापार जगत में नई बहस शुरू कर दी है। जहां डिजिटल भुगतान ने बाजार को तेज और सुविधाजनक बनाया है, वहीं व्यापारी लागत बढ़ने की आशंका जता रहे हैं।
फिलहाल कानपुर के बाजारों में व्यापारी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। आने वाले समय में शुल्क व्यवस्था को लेकर अंतिम निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगा कि इसका डिजिटल भुगतान और कारोबार पर कितना असर पड़ेगा।





